2/3/09

Taking Care


English Translation of A Dialog from a HINDI Film Taare Zameen Par,
Original Hindi Version http://merakhayal.blogspot.com/2008/01/blog-post.html

Taking Care is very important
It has power to cure
It can heal for Sure

He feels secure
Because someone taking care
Of him for Sure

A warm Hug
A sweet Kiss
To show, I care
Yes Dear,
I love you and
I always here.

What happened?!
If you Slipped or
You made a Mistake
Come to Me
I am here for your sake

These words of Life.
Taking Care is very important.

Translated By : Praveen Parihar

11/1/08

आज अपने जन्मदिवस पर



आज
अपने जन्मदिवस पर
याद मुझे आता है वो दिन
जब मैं इस जग में आया था
और पिता के हाथो से
घुट्टी का अमृत पाया था ।

मेरी माँ का स्पर्श मुझे
मन चाही राहत देता था
और मैं अपने भाई-बहन की
गोदी में झुला करता था ।

याद मुझे आती वो बुढीया
दस पैसे की उसकी पुढीया
दस पैसे की मछली भी थी
दस पैसे की थी इक गुडिया।

मेरे पिता की वो गहरी बातें
जो हर पल मुझको बतलाते थे
वो कुछ हल्के भारी शब्दों में
जीवन का रस मुझे समझाते थे ।

याद मुझे आते सब सहपाठी
जो खेल कूद में भी थे साथी
प्यार मौहब्बत झगडा भी था
पर
मेरे वॊ थे सच्चे साथी ।

और याद मुझे आते वो खेल
थका नही जिन्हे खेल-खेळ
चोर-पुलिस, कंचे का खेल
और अँताक्षिरी में सही मेल।

और यूँहि कुछ वर्षो के बाद
कुछ संगी साथी बिछड गए
और यूँहि बस अंजाने में
कुछ ख्वाब अधूरे बिखर गये ।

कुछ साथी बिछुडे कुछ नये मिले
कुछ कबके बिछुडे आज मिले
कुछ साथी ऎसे भी बिछुडे
जो आज तलक भी नही मिले ।

कुछ साथी ऎसे भी बिछूडे जो
कभी नही अब मिल पायेगें
अपनी कुछ मिठी यादों से
याद मुझे वो सब आयेगें।

आज नये कई साथी है और
आज नये कई रिश्ते भी है
नया विश्वास है नये साथी का
अहसास नया है नये रिश्ते का।

हर साथी हर रिश्ते के साथ
मैं आगे जीवन यात्रा करता हूँ
और आज अपने जन्मदिवस पर
धन्यवाद मैं करता हूँ
धन्यवाद मैं करता हूँ ।

प्रवीण परिहार


2/1/08

ख्याल



फिल्म "तारे ज़मीन पर" का एक मह्त्वपुर्ण संवाद, जो इस फ़िल्म का सार भी है। आमिर खान साहब ने बहुत ही अदाकारी से कहा है ।
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ख्याल करना बहुत जरुरी है
इसमे ईलाज की शक्ति है,
एक मर्हम है, जिससे दर्द मिटता है ।

उसको तस्ल्ली है कि कोई है
जॊ उसका  ख्याल  रखता है ।

एक-आद झप्पी, प्यार भरी पप्पी,
ये दिखाने को, कि मैं  ख्याल  रखता हूँ,
हाँ मैं तुम्से बहुत प्यार करता हूँ ।

अगर कोई फिक्र हो तो मेरे पास आओ,
क्या हुआ जो फिसल गये या कोई गलती हुई,
मैं हूँ न ।
ये एक दिलासा ।

ख्याल करना बहुत जरुरी है ।

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प्रवीण परिहार

25/12/07

प्यार का नाता हमारा


मै क्या कहूँ कि तुम मेरे लिए क्या हो।

मेरी धडकनो का साज़ तुम,
और गीत की आवाज तुम,
तुम ही मेरी आरज़ू हो,
मेरी चाहतो का राज़ तुम ।

हिज्र की इस रात में भी,
देखो मेरे पास हो तुम,
दिल पे हाथ मै जो रख दू,
मेरे दिल के पास हो तुम ।


तुम खुद मेरी परछाईयों में,
और रात की तन्हाईयॊ में,
खुवाब जो देखे अभी तक,
हर खुबसुरत ख्वाब हो तुम।

मै तुम्ही को चाहता हूँ,
दिल की गहराईयो तक,
और साथ तेरा चाहता हूँ,
मै उम्र की ऊँचाईयो तक ।

आज मेरी इन चाहतो ने,
देख तुझे कितना पुकारा,
दुर तक अब जाएगा ये,
प्यार का नाता हमारा ।

दुर तक अब जाएगा ये,
प्यार का नाता हमारा ।


प्रवीण परिहार

22/11/07

आईने वाली लडकी


सुनो
आईने के सामने जाकर
उस आईने वाली लडकी से
पुछना कि वो मुझे
क्यों इतना प्यार करती है ?

इतना प्यार कि
मेरे दिल में भी नही समाता
कई बार भरकर बह जाता है
मेरी ही आँखो के किनारे से
पानी की तरह ।

पुछना उससे कि क्यो
उसने अपनी तन्हाईयो को
मेरी आहटो से भंग किया
और क्यों अपने सपनो को
मेरे रंग से यूँ रंग दिया ।

पुछना उससे कि क्यों
उसने अपने ख्यालों में
मुझे इसकदर सजाकर
मेरी इस जीवन को
इतना मान दिया ।

ये सब जरूर पुछना उस
आईने वाली लडकी से ।

जरुर पुछोगी ना ।

प्रवीण परिहार

25/10/07

ख़त का जवाब


भेजकर ख़त हल-ए-दिल अपना,
अब उसके जवाब का इंतेज़ार करता हूँ
मेरे ख़त का जवाब जल्दी से आये,
बस यही दुआ बार-बार करता हूँ

देर से बैठा मैं तकता हूँ परिंदों को,
कोई मेरे दरवाजे पर दस्तक नही करता,
ख़त तो लाते है ले जाते है सभी पर
कोई मेरे नाम कि आवाज़ नही करता

मेरे दिल को भी अब न जाने क्या हो गया है,
मुझसे अब ये बरोबर वफ़ा नही करता
जब मै पुछ्ता हूँ इससे ख़त कि देरी का सबब,
ये भी मेरे महबूब की तरह खामोश रहता है,
कोई धड्कन नही करता।

प्रवीण परिहार

3/9/07

राधा मेरा प्रथम प्रेम



राधा मेरा प्रथम प्रेम सही पर
अर्धांग्नी मेरी तुम हो प्रिय
राधा मेरा आत्मप्रेम सही पर
मेरे ह्र्दय में तेरा वास प्रिय।

राधा मेरी इच्छा थी पर
अब धर्म मेरा केवल तुम हो
राधा मेरा स्वपन सही पर
वास्तविक्ता मेरी तुम हो।

तेरी ईर्षा निराधार नही पर
अब न कुछ मेरे बस में है
राधा को मेरे स्वप्नो में तो
प्रिय अब तुम रहने दो।

प्रिय अब तुम रहने दो।।
प्रवीण परिहार

12/7/07

दोस्त

मेरा इक दोस्त कुछ इस तरह से साथ है मेरे,
उसका दिल कही ओर पर वो पास है मेरे,
काश वो कहे मुझसे अपनी बेबसी का सबब,
शायद उसके दर्द की दवा पास हो मेरे।

मेरे दोस्त तेरे दर्द की हर कोशिश दवा करेगें,
गर कोई दवा काम न आई तो हम दुआ करेगें,
मेरे दोस्त तू मेरी दोस्ती की तपिश से वाकिफ नही,
दोस्ती की कसम हम मरते दम तक तुझसे वफा करेगें।

हम तेरे गम में शरीक होने की खुआईश रखते है,
मेरे दोस्त, तुझसे यहीं इक छोटी-सी इल्तेजा करते है,
हम पर इक बार इनायत तो कर मेरे दोस्त,
हम तेरे हर दर्द को मिटाने की आरज़ू रखते है।

जान भी जाये अगर यारी में यारों गम नही,
अपने होते यार हो गमभीन मतलब हम नही।



प्रवीण परिहार

यार मेरा मुझे छोड गया।


यह उन दोस्तो के लिए जो न जाने किस वजह से हमसे बिछड जाते है। और हमें सदैव ये आशा रहती है कि वे कभी न कभी फिर मिलेगें।

यार मेरा मुझे छोड गया।

यार मेरा मुझे छोड गया
पर याद उसे मैं हूँ अब भी
यारों में शामिल हूँ तो नही
पर यादों में शामिल हूँ अब भी।

मुद्ददत हुई उसने मुझको
न देखा और न खत् भेजा
मेरा पता तो भुल गया पर
न भुल सका मुझ अब तक भी।

यार मुझसे रूठ गया और
अब रूठा हूँ मैं भी उससे
पर न चाहकर भी राह तकु
ये कैसी चाहत है अब भी।

प्रवीण परिहार

11/6/07

लम्हें

कभी-कभी जिन्दगीं के कुछ लम्हें,
यादों के गलियारों से गुजरते हुऐ,
वर्तमान के कक्ष में ऐसी महक फेला देते है जिससे,
वर्तमान ही नही भविष्य भी सुग्धिंत हो जाता है।

प्रवीण परिहार

13/3/07

मेरे घर में कोई और

लगता है मेरे घर में कोई और आ गया शायद,
तेरे दिल की धडकने कुछ अंजान सी लगती है।
हो सकता है कि ये मेरी भुल हो शायद,
पर आज तेरी ये नज़र कुछ बेईमान सी लगती है।।

तेरा जो दर्द मेरे दिल में है, सोचता हूँ उसकी दवा न करु,
तुझको तेरे जाने के बाद मैं खुद से यूँ जुदा न करु।
दुआ करना कि मैं मर जाऊँ एकदम,
तेरा नाम लेके यूँ खुदा- खुदा न करु।।

प्रवीण परिहार

9/9/06

दुरियों के दरमियां




मैं यहाँ और तू वहाँ
ये दुरियों हैं दरमियां।
शुकरीयाँ इन दुरियों का,
तुम मिली जिन दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
मिलते है दिल को रास्ते।
और कभी मिलती है मंजिल,
उन रास्तों के दरमियां ।।

इन दुरियों के दरमियां,
तन्हाईयों का है बसर।
और बस तेरा खयाल,
इन तन्हाईयों के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
मैं तेरे करीब आया सनम,
दिल ने तुझे पाया करीब,
इन दुरियों के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
हर रोज मैं तुमसे मिला।
थे यहाँ बस तुम और मैं,
और कुछ नही था दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
जाग कर देखे है ख्वाब।
और मैं कभी सोया नही,
इन ख्वाबों के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
भाँती नही महफिल मुझे।
कुछ खोया रहता हूँ मैं,
इन महफिलों के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
दिल यूँ धडकता है मेरा।
नाम लेता है तेरा ये अब,
दो धडकनों के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
तेरे ख्यालों का कारवाँ।
मैं देर तक चलता रहा,
इस कारवाँ के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
मैं मूंद लू अपनी पलक।
और तुम यहाँ मौजूद हो,
इन दो पलक के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
इक जरा सा दर्द भी।
और मिठी सी कशीश है,
इस दर्द के दरमियां।।

इन दुरियों के दरमियां,
दिल ने मिटाई ये दुरियां।
अब तो है अपनी मौहब्बत,
इन दो दिलों के दरमियां।।

अब जो अपने दरमियां,
ये दुरियों बस कहने को है।
देख हम हुए कितने करीब,
इन दुरियों के दरमियां।।


प्रवीण परिहार

8/8/06

विवाह


हमारे मानव समाज में विवाह की बहुत मानयता है। ये विवाह का विचित्र बन्धन सदियों से ही हमारे समाज का अंग रहा है। इस बन्धन को समझने का प्रयास मैं अपनी एस कविता में कर रहा हूँ।

विवाह

ये विवाह इक बन्धन ऐसा,
इक रेशम की डोरी जैसा,
इस डोरी में विश्वास का बल है,
हिमालय के पर्वत जैसा ।

इस बन्धन की आत्मा प्रेम है,
इस बन्धन के मायने प्रेम है,
दोनो ने इक होकर जाना,
वो दो जिस्म पर जान एक है।

इस बन्धन की गाँठ निराली,
जो कहो वो बात निराली,
घर सजे यूँ जैसे दिवाली,
और तुलसी वाली बात निराली।

इस बन्धन का रंग है पीला,
जिस पर छाया वो रंगीला,
इस रंग से दुल्हन शरमायी,
और देखो दुल्हा बना सजीला।

इस बन्धन के सात वचन,
जैसे सुर के सात भजन,
जिसने जाना इन वचनो को,
साथ रहे वो सात जनम।

प्यार-मौहब्बत धन-दोलत भारी,
तुम्हारी हो ये खुशीयाँ सारी,
इस बन्धन से सबकी यारी,
आज तुम्हारी कल हमारी बारी।

प्रवीण परिहार

7/7/06

कौन है गालिब ?




यह आपने जरुर सुना होगा
"वो पुछते हैं कि गालिब कौन है,
कोई बतलाए कि हम बतलाए क्या।"
यह बतलाने कि कोशिश मैंने कुछ इस तरह की;

कौन है गालिब ?

आशिक की वफा गालिब,
हुस्न की अदा गालिब,

मौहब्बत की गजल गालिब,
खामोशी की जुबाँ गालिब,

इश्क का सबक गालिब,
बेखुदी का सबब गालिब,

इकरार की हया गालिब,
इनकार की सजा गालिब,

महफिल की शमा गालिब,
तन्हाई की गुफ्तगु गालिब,

शायर का ख्याल गालिब,
सुखनवर का अंदाज गालिब,

मिलन की अरजू गालिब,
जुदाई का सरुर गालिब,

उस के दिल की बात गालिब,
मेरे दिल का राज गालिब,

और ज्यादा क्या कहूँ मैं
हम सबके दिल का हाल गालिब।

प्रवीण परिहार

5/7/06

पुकारता है घर मेरा



इतने दिनों तक घर से दुर रहने के बाद घर की बहुत याद आती है। घरवालें, दोस्त, त्यौहार सभी कुछ।सभी पुकार-पुकार कर यहीं कहते है "अब तो आजा"।


पुकारता है घर मेरा
कहता है अब तो आजा।

वो रास्ते वो हर गली,
वो हर दर, वो दरवाजा,
करते है सब तकाजा,
कहते हैं अब तो आजा।

फाल्गुन की देखो होली,
उडधंग मचाती टोली,
होली के सारे रंग,
सब दोस्तो के संग,
करते है सब तकाजा,
कहते हैं अब तो आजा।

प्यारी सी मेरी बहना,
उसका भी है ये कहना,
मेरे प्यारे भईया राजा,
इस राखी पे घर को आजा,
मेरी बहना और उसकी राखी,
दोनो करती है यूँ तकाजा,
कहती हैं अब तो आजा।

प्यारी सी मेरी मईयाँ,
बनाती है जब सैवईयाँ,
कहती है जल्दी आजा,
जल्दी से आ के खाजा,
वो खीर वो पताशा,
करते है सब तकाजा,
कहते हैं अब तो आजा।

मेरी भाँज़ी और भाँज़ें,
सब उडधंग में है साँज़े,
कहते है देखो - मामा,
जल्दी से घर को आना,
और तोहफे हमारे लाना,
वो सब मुस्कुराकर ऐसे,
करते है यूँ तकाजा,
कहते हैं अब तो आजा।

प्रवीण परिहार

1/7/06

यार मेरा मुझे भुल गया ?


(यह कविता, मैंने मेरे उस दोस्त के लिए लिखी थी, जिसका कई दिनो से कोई पत्र नही आया था, पर इस कविता ने अपना कमाल दिखाया और उसने फिर से पत्र लिखा।)

यार मेरा मुझे भुल गया ?

यार मेरा मुझे भुल गया
या याद उसे मैं हुँ अब भी,
कल तक था यारो में शामिल
क्या मैं शामिल हूँ अब भी।

मुद्ददत हुई उसने मुझको
इक बार भी खत् नही भेजा,
मेरा पता वो भुल गया
या याद उसे ये है अब भी।

मेरा यार मुझसे रूठ गया
या रूठा है रब तू मुझसे,
राह तकते मैं थक तो गया पर
उम्मीद इस दिल में है अब भी।

प्रवीण परिहार

21/6/06

इशक होता नही सभी के लिए


इशक होता नही सभी के लिए,
ये बना है किसी-किसी के लिए,
कोई महबूब लाजमी नही आशिकी के लिए,
महबूब का खयाल ही काफी है शायरी के लिए,
उस खयाल को किसी रूह या सुरत की जरूरत नही होती,
हम आँखें मूंद लेते है महबूब के दिदार के लिए।


प्रवीण परिहार

15/6/06

मैं और उसकी मोहब्बत




ये मौहब्बत की कहानी है उस लडकी की, जिसने कभी अपनी मौहब्बत का इज़ाहार नही किया। करती भी कैसे लडकी जो थी। नसीब देखीए उस लडके ने भी कभी उस लडकी के जज़्बातों पर गोर नही किया। एक दिन उस लडकी की शादी हो गयी, पर आज भी वो लडकी कभी-कभी ये सोचती है कि काश ऐसा न हुआ होता।

मैं और उसकी मौहब्बत

मेरे नसीब में उसकी मौहब्बत नही थी,
या मेरी मौहब्बत में इतनी चाहत नही थी,
मेरे हर ख्वाब क्या केवल ख्वाब ही थे
या मेरी जिन्दगी, जिन्दगी नही थी।

मैं आज भी तन्हाई में ये सोचती हूँ,
गर ये वक्त मेरी मौहब्बत का साथ देता,
मेरी नज़रो ने मेरे दिल का हाल कहा होता,
तो यकिनन वो मेरी आँखों में
मेरी मौहब्बत पहचान लेता।

मेरी जिन्दगी आज कुछ और होती,
गर वो मेरी मौहब्बत पहचान लेता,
अच्छा हुआ जो आँसुओं के रंग नही होते
वरना ये जमाना मेरी डोली पर,
मेरे अश्को से उसे पहचान लेता।

प्रवीण परिहार





(This is about a Girl who loves a boy but can't tell him. How she can? After all she is a girl. That boy never notice this. Now she got married but still sometime, she remember her past and She thinks ... ).

Main Aur Uski Mohabbat

Mere nasib mein uski mohabbat nahi thi,
Ya meri mohobaat mein itni chahat nahi thi,
Mere har khuab kya sirf khuab hi the,
Ya Meri jindagi shayad jindagi hi nahi thi .

Mein aaj bhi tanhaai mein ye sochti hun,
Gar ye waqt meri mohobat ka saath deta,
Gar meri nazoro ne mere dil ka hal kaha hota,
To yakinan wow meri aankhon mein hi,
Meri mohobabt ko pehchan leta .

Meri jindagi aaj kuchh aur hoti,
gar wow meri mohabbat pahchan leta,
achha hua jo asuno ke rang nahi hote,
varna ye jamana meri doli per,
mere ashko se use pahechan leta.


Praveen Parihar

9/6/06

प्रियवर तुम अब घर आ जाओ।


नारी चरित्र सदैव से ही कवियों और लेखको का प्रिय विषय रहा है, मेरा भी। अपनी इस कविता के माध्यम से मैं उस नारी के बिताए, उन चौदह वर्षो के कठिन समय का वर्णन करना चाहता हूँ, जो उन्होने अपने पति से दूर व्यतित किए। ये आदरणीय नारी थी, भगवान श्री राम के अनुज लक्ष्मण जी की धर्मपत्नि उर्मीला जी।

प्रियवर तुम अब घर आ जाओ।

मेरा जीवन कुछ नही है
केवल इक ठण्डी प्यास है
इस कडकती सरद में केवल
तेरी आंस की आँच है।

जेठ माह का हर दिन मुझे
यहाँ देखकर यूँ है चकित
उसके दोपहर की धुप से
अधिक मेरे ह्दय की ताप है।

कुछ न पुछो मेरे सावन
कैसे है तुम बिन ये साजन
कुछ ही बरसे है गगन से
शेष मेरी आँखों मे हैं।

मेरे बसंत के हर पुष्प ने
काँटों से है श्रृंगार किया
फागुन के हर इक रंग ने
मेरे अशुरो में है स्नान किया।

प्रत्येक वर्ष में चार ऋतुऐं
शरद, गीष्म, बसन्त और पतझड़
मेरे इन चौदह वर्षो में
एक ऋतु केवल पतझड़।

इस पतझड़ के परिवर्तन को
प्रियवर तुम अब घर आ जाओ
इन ऋतुओ के परिवर्तन को
मेरे प्रियवर तुम अब घर आ जाओ।

मेरे प्रियवर तुम अब घर आ जाओ।
मेरे प्रियवर तुम अब घर आ जाओ।

प्रवीण परिहार


This is about the feeling of Urmila ji (wife of yonger brother of Lord RAMA, LAXMAN).How she spend her 14 years in waiting for her husband. How she spend her every season.


Priyvar tum ab ghar aa jao.

Mera jivan kuchh nahi hai
keval ek thandi pyas hai
es kadkti sard mein keval
teri aans ki aanch hai

Jeth mah ka hur din mujhe
yanha dekh kar yu hai chakit
uske dopaher ki dhop se adhik
mere hirdye ki taap hai

Kuch na puchho mere sawan
kaise hai tum bin ye sajan
kuch hi barae hai gagan se
shesh meri aankho mein hai

Mere basant ke hur pushp ne
kanton se shringar kiya
fagun ke har ek rang ne
mere ashro mein snnan kiya

Pratyek varsh mein char rituae
shard,grishm, basant aur Patjhad
mere in chodha varsho mein
ek ritu hai kevel patjhad

Is patjhad ke parivartan ko
priyvar tum ab ghar aa jao
in rituo ke parivartan ko
priyvar tum ab ghar aa jao.


Priyvar tum ab ghar aa jao.
Priyvar tum ab ghar aa jao.

Praveen Parihar

5/5/06

Jab Mohobat Hoti Hai



Jab mohobat hoti hai, to dil hamara nahi rahta
Sabhi apne hi lagte hai, koi paraya nahi rahta
Duriyon mein bhi fasla, darmiyan nahi rahta
Aur tanhaiyon mein koi, tanhan nahi rahta.

Dil mein yunhi ek din, kisi ki ahat hoti hai
Hasin sapne hote hai, kisi ki chahat hoti hai
Dil yunhi khamoshi se tanhai, mein gungunata rahta hai
Ye khuda hi janta hai ki, us ghar mein kon rahata hai

Yunhi tez aur mand hoti, ye dhadkane dil ki
Yunhi tanhaiyo mein, ye ajeeb si guftgoo dil ki
Ese mein waqt gujarta nahi, thama rahta hai
Use bhi malum hai, es pal kiske sath kon rahta hai



Praveen Parihar