
यह उन दोस्तो के लिए जो न जाने किस वजह से हमसे बिछड जाते है। और हमें सदैव ये आशा रहती है कि वे कभी न कभी फिर मिलेगें।
यार मेरा मुझे छोड गया।
यार मेरा मुझे छोड गया
पर याद उसे मैं हूँ अब भी
यारों में शामिल हूँ तो नही
पर यादों में शामिल हूँ अब भी।
मुद्ददत हुई उसने मुझको
न देखा और न खत् भेजा
मेरा पता तो भुल गया पर
न भुल सका मुझ अब तक भी।
यार मुझसे रूठ गया और
अब रूठा हूँ मैं भी उससे
पर न चाहकर भी राह तकु
ये कैसी चाहत है अब भी।
प्रवीण परिहार

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