3/9/07

राधा मेरा प्रथम प्रेम



राधा मेरा प्रथम प्रेम सही पर
अर्धांग्नी मेरी तुम हो प्रिय
राधा मेरा आत्मप्रेम सही पर
मेरे ह्र्दय में तेरा वास प्रिय।

राधा मेरी इच्छा थी पर
अब धर्म मेरा केवल तुम हो
राधा मेरा स्वपन सही पर
वास्तविक्ता मेरी तुम हो।

तेरी ईर्षा निराधार नही पर
अब न कुछ मेरे बस में है
राधा को मेरे स्वप्नो में तो
प्रिय अब तुम रहने दो।

प्रिय अब तुम रहने दो।।
प्रवीण परिहार

12/7/07

दोस्त

मेरा इक दोस्त कुछ इस तरह से साथ है मेरे,
उसका दिल कही ओर पर वो पास है मेरे,
काश वो कहे मुझसे अपनी बेबसी का सबब,
शायद उसके दर्द की दवा पास हो मेरे।

मेरे दोस्त तेरे दर्द की हर कोशिश दवा करेगें,
गर कोई दवा काम न आई तो हम दुआ करेगें,
मेरे दोस्त तू मेरी दोस्ती की तपिश से वाकिफ नही,
दोस्ती की कसम हम मरते दम तक तुझसे वफा करेगें।

हम तेरे गम में शरीक होने की खुआईश रखते है,
मेरे दोस्त, तुझसे यहीं इक छोटी-सी इल्तेजा करते है,
हम पर इक बार इनायत तो कर मेरे दोस्त,
हम तेरे हर दर्द को मिटाने की आरज़ू रखते है।

जान भी जाये अगर यारी में यारों गम नही,
अपने होते यार हो गमभीन मतलब हम नही।



प्रवीण परिहार

यार मेरा मुझे छोड गया।


यह उन दोस्तो के लिए जो न जाने किस वजह से हमसे बिछड जाते है। और हमें सदैव ये आशा रहती है कि वे कभी न कभी फिर मिलेगें।

यार मेरा मुझे छोड गया।

यार मेरा मुझे छोड गया
पर याद उसे मैं हूँ अब भी
यारों में शामिल हूँ तो नही
पर यादों में शामिल हूँ अब भी।

मुद्ददत हुई उसने मुझको
न देखा और न खत् भेजा
मेरा पता तो भुल गया पर
न भुल सका मुझ अब तक भी।

यार मुझसे रूठ गया और
अब रूठा हूँ मैं भी उससे
पर न चाहकर भी राह तकु
ये कैसी चाहत है अब भी।

प्रवीण परिहार

11/6/07

लम्हें

कभी-कभी जिन्दगीं के कुछ लम्हें,
यादों के गलियारों से गुजरते हुऐ,
वर्तमान के कक्ष में ऐसी महक फेला देते है जिससे,
वर्तमान ही नही भविष्य भी सुग्धिंत हो जाता है।

प्रवीण परिहार

13/3/07

मेरे घर में कोई और

लगता है मेरे घर में कोई और आ गया शायद,
तेरे दिल की धडकने कुछ अंजान सी लगती है।
हो सकता है कि ये मेरी भुल हो शायद,
पर आज तेरी ये नज़र कुछ बेईमान सी लगती है।।

तेरा जो दर्द मेरे दिल में है, सोचता हूँ उसकी दवा न करु,
तुझको तेरे जाने के बाद मैं खुद से यूँ जुदा न करु।
दुआ करना कि मैं मर जाऊँ एकदम,
तेरा नाम लेके यूँ खुदा- खुदा न करु।।

प्रवीण परिहार