11/1/08

आज अपने जन्मदिवस पर



आज
अपने जन्मदिवस पर
याद मुझे आता है वो दिन
जब मैं इस जग में आया था
और पिता के हाथो से
घुट्टी का अमृत पाया था ।

मेरी माँ का स्पर्श मुझे
मन चाही राहत देता था
और मैं अपने भाई-बहन की
गोदी में झुला करता था ।

याद मुझे आती वो बुढीया
दस पैसे की उसकी पुढीया
दस पैसे की मछली भी थी
दस पैसे की थी इक गुडिया।

मेरे पिता की वो गहरी बातें
जो हर पल मुझको बतलाते थे
वो कुछ हल्के भारी शब्दों में
जीवन का रस मुझे समझाते थे ।

याद मुझे आते सब सहपाठी
जो खेल कूद में भी थे साथी
प्यार मौहब्बत झगडा भी था
पर
मेरे वॊ थे सच्चे साथी ।

और याद मुझे आते वो खेल
थका नही जिन्हे खेल-खेळ
चोर-पुलिस, कंचे का खेल
और अँताक्षिरी में सही मेल।

और यूँहि कुछ वर्षो के बाद
कुछ संगी साथी बिछड गए
और यूँहि बस अंजाने में
कुछ ख्वाब अधूरे बिखर गये ।

कुछ साथी बिछुडे कुछ नये मिले
कुछ कबके बिछुडे आज मिले
कुछ साथी ऎसे भी बिछुडे
जो आज तलक भी नही मिले ।

कुछ साथी ऎसे भी बिछूडे जो
कभी नही अब मिल पायेगें
अपनी कुछ मिठी यादों से
याद मुझे वो सब आयेगें।

आज नये कई साथी है और
आज नये कई रिश्ते भी है
नया विश्वास है नये साथी का
अहसास नया है नये रिश्ते का।

हर साथी हर रिश्ते के साथ
मैं आगे जीवन यात्रा करता हूँ
और आज अपने जन्मदिवस पर
धन्यवाद मैं करता हूँ
धन्यवाद मैं करता हूँ ।

प्रवीण परिहार


2/1/08

ख्याल



फिल्म "तारे ज़मीन पर" का एक मह्त्वपुर्ण संवाद, जो इस फ़िल्म का सार भी है। आमिर खान साहब ने बहुत ही अदाकारी से कहा है ।
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ख्याल करना बहुत जरुरी है
इसमे ईलाज की शक्ति है,
एक मर्हम है, जिससे दर्द मिटता है ।

उसको तस्ल्ली है कि कोई है
जॊ उसका  ख्याल  रखता है ।

एक-आद झप्पी, प्यार भरी पप्पी,
ये दिखाने को, कि मैं  ख्याल  रखता हूँ,
हाँ मैं तुम्से बहुत प्यार करता हूँ ।

अगर कोई फिक्र हो तो मेरे पास आओ,
क्या हुआ जो फिसल गये या कोई गलती हुई,
मैं हूँ न ।
ये एक दिलासा ।

ख्याल करना बहुत जरुरी है ।

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प्रवीण परिहार

25/12/07

प्यार का नाता हमारा


मै क्या कहूँ कि तुम मेरे लिए क्या हो।

मेरी धडकनो का साज़ तुम,
और गीत की आवाज तुम,
तुम ही मेरी आरज़ू हो,
मेरी चाहतो का राज़ तुम ।

हिज्र की इस रात में भी,
देखो मेरे पास हो तुम,
दिल पे हाथ मै जो रख दू,
मेरे दिल के पास हो तुम ।


तुम खुद मेरी परछाईयों में,
और रात की तन्हाईयॊ में,
खुवाब जो देखे अभी तक,
हर खुबसुरत ख्वाब हो तुम।

मै तुम्ही को चाहता हूँ,
दिल की गहराईयो तक,
और साथ तेरा चाहता हूँ,
मै उम्र की ऊँचाईयो तक ।

आज मेरी इन चाहतो ने,
देख तुझे कितना पुकारा,
दुर तक अब जाएगा ये,
प्यार का नाता हमारा ।

दुर तक अब जाएगा ये,
प्यार का नाता हमारा ।


प्रवीण परिहार

22/11/07

आईने वाली लडकी


सुनो
आईने के सामने जाकर
उस आईने वाली लडकी से
पुछना कि वो मुझे
क्यों इतना प्यार करती है ?

इतना प्यार कि
मेरे दिल में भी नही समाता
कई बार भरकर बह जाता है
मेरी ही आँखो के किनारे से
पानी की तरह ।

पुछना उससे कि क्यो
उसने अपनी तन्हाईयो को
मेरी आहटो से भंग किया
और क्यों अपने सपनो को
मेरे रंग से यूँ रंग दिया ।

पुछना उससे कि क्यों
उसने अपने ख्यालों में
मुझे इसकदर सजाकर
मेरी इस जीवन को
इतना मान दिया ।

ये सब जरूर पुछना उस
आईने वाली लडकी से ।

जरुर पुछोगी ना ।

प्रवीण परिहार

25/10/07

ख़त का जवाब


भेजकर ख़त हल-ए-दिल अपना,
अब उसके जवाब का इंतेज़ार करता हूँ
मेरे ख़त का जवाब जल्दी से आये,
बस यही दुआ बार-बार करता हूँ

देर से बैठा मैं तकता हूँ परिंदों को,
कोई मेरे दरवाजे पर दस्तक नही करता,
ख़त तो लाते है ले जाते है सभी पर
कोई मेरे नाम कि आवाज़ नही करता

मेरे दिल को भी अब न जाने क्या हो गया है,
मुझसे अब ये बरोबर वफ़ा नही करता
जब मै पुछ्ता हूँ इससे ख़त कि देरी का सबब,
ये भी मेरे महबूब की तरह खामोश रहता है,
कोई धड्कन नही करता।

प्रवीण परिहार